क्या वक्री ग्रह अपनी कक्षा में उलटा चलने लगता है?
नहीं। वक्री या रेट्रोग्रेड गति में ग्रह तारों के सापेक्ष पीछे जाता दिखता है। यह पृथ्वी और उस ग्रह की आपसी गति के कारण होता है।
कदम 1
वक्री गति का अर्थ
वक्री या प्रतिगामी उस अवधि को कहते हैं जब कोई ग्रह पृष्ठभूमि के तारों के सापेक्ष पूर्व से पश्चिम की ओर चलता दिखता है, यानी अपनी सामान्य दिशा के उलट। ग्रह अपनी कक्षा में लगातार आगे बढ़ता रहता है।
कदम 2
मंगल का उदाहरण
पृथ्वी और मंगल दोनों सूर्य की परिक्रमा करते हैं। जब पृथ्वी मंगल के बराबर पहुँचकर उससे आगे निकलती है, तो हमारी बदलती दृष्टि-रेखा के कारण मंगल दूर के तारों के सापेक्ष पीछे खिसकता दिखता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी धीमी कार को ओवरटेक करते समय वह पीछे जाती लगती है।
कदम 3
संख्याएँ पढ़ें
एक सरल उदाहरण में मान लें कि ग्रह का क्रांतिवृत्तीय देशांतर एक तारीख को 120.5° और अगली तारीख को 120.3° है। यह कमी आभासी वक्री गति दिखाती है। ये केवल उदाहरण के अंक हैं। वास्तविक सारणी में 360°–0° की सीमा भी देखें: 359.9° से 0.1° होना शून्य के पार आगे बढ़ना है, बहुत पीछे लौटना नहीं।
कदम 4
विवरण और व्याख्या को अलग रखें
खगोल विज्ञान बताता है कि आकाश में ग्रह कहाँ दिखता है। वक्री अवधियों के ज्योतिषीय अर्थ अलग व्याख्याएँ हैं। Astro Aunty वक्री अवधियों की गणना नहीं करता।