कठोपनिषद में ॐ का अर्थ
यम और नचिकेता के संवाद में ॐ के अर्थ को समझें। यहाँ यह पवित्र अक्षर ब्रह्म की ओर संकेत करता है और साधक के चिंतन का आधार बनता है।
कदम 1
यम के उत्तर से शुरू करें
द्वितीय भाग के खंड XV-XVII में यम वेदों द्वारा बताए गए आध्यात्मिक लक्ष्य को ॐ कहते हैं। आगे के मंत्र इसे ब्रह्म और श्रेष्ठ आधार बताते हैं।
कदम 2
यहाँ ब्रह्म का अर्थ समझें
परमानंद यहाँ ब्रह्म शब्द का प्रयोग परम आध्यात्मिक सत्ता के लिए करते हैं। इसी अर्थ को ध्यान में रखकर पढ़ें: यह पवित्र अक्षर उस सत्य की ओर संकेत करता है जिसे साधक जानना चाहता है।
कदम 3
पूर्णता के भाव को समझें
मंत्रों में इच्छाओं की पूर्ति का उल्लेख आता है। परमानंद की टीका इसका अर्थ ईश्वर में पूर्णता पाना बताती है। विषय आत्मिक अनुभूति है, किसी खास इच्छा को पूरा कराने की विधि नहीं।
कदम 4
एक छोटा-सा चिंतन
किसी ऐसे शब्द के बारे में सोचें जिसे सुनकर कोई प्रिय व्यक्ति याद आता है। फिर विचार करें कि कोई पवित्र शब्द भक्त का मन ईश्वर की ओर कैसे मोड़ सकता है। पढ़ते समय इस उदाहरण पर सोचकर देख सकते हैं।
यहाँ ॐ का उल्लेख आत्मा और परम सत्य को समझने के संवाद में आया है।