सौर मास और चांद्र मास में क्या अंतर है?
सौर मास सूर्य के एक राशि पार करने से बनता है और चांद्र मास 30 तिथियों से; इसलिए दोनों का एक साथ शुरू होना ज़रूरी नहीं है।
कदम 1
सौर मास: एक राशि
इस पारंपरिक गणना में सौर मास सूर्य के एक 30-अंश की राशि में प्रवेश से अगली राशि में प्रवेश तक चलता है। सूर्य किसी राशि में 15° पर हो तो अगले प्रवेश तक 15° और बाकी हैं। यह कोण की दूरी है, दिनों की संख्या नहीं।
कदम 2
चांद्र मास: तीस तिथियाँ
चांद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं। हर तिथि सूर्य से चंद्रमा की बढ़त में 12 अंश का हिस्सा है। यह बदलती स्थितियों से मापी जाती है, आधी रात से नहीं; इसलिए 30 तिथियों का मतलब कैलेंडर की 30 तारीखें नहीं है।
कदम 3
चांद्र मास का नाम पहचानें
कार्तिक जैसे नामों का नक्षत्रों से पारंपरिक संबंध है। कार्तिक का संबंध कृत्तिका से है। केवल महीने का नाम देखकर किसी खास तारीख पर चंद्रमा का सही नक्षत्र तय नहीं किया जा सकता; उसके लिए पंचांग की अलग नक्षत्र-प्रविष्टि पढ़ें।
कदम 4
शीर्षक साथ रखकर पढ़ें
मेष राशि से जुड़े सौर मास और कार्तिक जैसे चांद्र मास के शीर्षक की तुलना करें। देखें कि दोनों में क्या गिना जा रहा है। फिर जाँचें कि नीचे की संख्याएँ कैलेंडर की तारीखें हैं या तिथियाँ और महीने की शुरुआत का कौन-सा नियम दिया गया है।