किन भावों को केंद्र कहते हैं?
पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव मिलकर केंद्र समूह बनाते हैं; इन उदाहरणों में हम हर पूरी राशि को एक भाव मानते हैं।
कदम 1
गिनती की शुरुआत तय करें
इन उदाहरणों में लग्न वाली राशि पहला भाव है और उसके बाद हर अगली राशि अगला भाव है। भाव बाँटने की दूसरी पद्धतियों में सीमाएँ अलग हो सकती हैं। भावों की गिनती लिखने से पहले लग्न वाली राशि चिह्नित करें।
कदम 2
उनके बीच का अंतर देखें
इस बराबर भागों वाले राशि-चक्र पर पहला, चौथा, सातवाँ और दसवाँ भाव एक-एक चौथाई वृत्त के अंतर पर हैं। पहले से तीन स्थान आगे चौथा, फिर सातवाँ और फिर दसवाँ आता है। तीन स्थान और बढ़ने पर फिर पहले पर पहुँचते हैं। इन्हें केंद्र या कोण कहा जाता है।
कदम 3
दूसरे नाम पहचानें
इसी समूह के लिए कंटक या चतुष्टय शब्द भी मिल सकते हैं। कुछ भावों के अपने दूसरे नाम हैं: चौथे को सुख, सातवें को जामित्र और दसवें को कर्म कहा जाता है। ये उन्हीं स्थानों के नाम हैं जिन्हें आपने गिना है; इनसे नए भाव नहीं जुड़ते।
कदम 4
एक उदाहरण हल करें
कर्क लग्न हो तो गिनें: कर्क 1, सिंह 2, कन्या 3, तुला 4। आगे गिनने पर मकर 7 और मेष 10 पर आते हैं। इसलिए केंद्र हैं कर्क, तुला, मकर और मेष। बारह राशियों का चक्र बनाएँ, इन चार स्थानों को चिह्नित करें और फिर किसी दूसरे लग्न से यही अभ्यास करें।