राशि और भाव में क्या अंतर है?
राशि, राशिचक्र के एक हिस्से का नाम है; यहाँ हर पूरी राशि को एक भाव मानकर, लग्न से उसकी भाव-संख्या गिनी गई है।
कदम 1
राशियों का क्रम वही रखें
बारह राशियों का क्रम मेष से मीन तक वही रहता है और हर राशि 30 अंश की होती है। वृषभ के 14 अंश पर कोई बिंदु उसी राशि और अंश पर रहेगा, चाहे भावों की गिनती किसी भी राशि से शुरू की जाए।
कदम 2
भाव गिनने का तरीका तय करें
इस उदाहरण में लग्न वाली पूरी राशि पहला भाव है। हर अगली पूरी राशि अगला भाव बनती है। इससे राशियों के सामने 1 से 12 तक भावों की संख्या लिख सकते हैं। भाव बाँटने की दूसरी पद्धतियों में सीमाएँ अलग हो सकती हैं, इसलिए रिपोर्ट में इस्तेमाल हुआ तरीका देखें।
कदम 3
एक राशि के अलग भाव-अंक देखें
अलग कुंडलियों में गिनती की शुरुआत अलग हो सकती है। जो राशि स्वयं लग्न होने पर पहला भाव है, वही उससे सामने वाली राशि लग्न होने पर सातवाँ भाव बनती है। राशि का नाम और भाव का अंक दो अलग बातें बताते हैं: राशिचक्र का कौन-सा हिस्सा और लग्न से गिनने पर कौन-सा स्थान।
कदम 4
एक उदाहरण हल करें
मकर लग्न हो तो मकर पहला भाव, कुंभ दूसरा, मीन तीसरा, मेष चौथा और कर्क सातवाँ भाव है। कर्क लग्न होने पर कर्क पहला और मकर सातवाँ भाव बन जाता है। राशियों का क्रम वही रखते हुए दोनों पूरी सूचियाँ साथ-साथ लिखें और उनके भाव-अंकों की तुलना करें।
Astro Aunty का निःशुल्क गुण मिलान चंद्रमा पर आधारित 36 में से मूल अंक निकालता है; यह भावों की गणना नहीं करता।