नैसर्गिक ग्रह-संबंधों की तालिका कैसे पढ़ें?
बृहत् जातक सत्याचार्य की बताई एक निश्चित तालिका अपनाता है। इसमें मित्र, सम यानी तटस्थ, और शत्रु—ये एक ग्रह के दूसरे ग्रह से संबंध के तकनीकी नाम हैं।
कदम 1
संदर्भ ग्रह की पंक्ति पढ़ें
पहले कॉलम में वह ग्रह चुनें जिससे संबंध देखना है। फिर उसी पंक्ति में दूसरे ग्रह का नाम खोजें। हर पंक्ति में बाकी छह ग्रह दिए गए हैं; ग्रह का स्वयं से संबंध शामिल नहीं है।
| संदर्भ ग्रह | मित्र | सम / तटस्थ | शत्रु |
|---|---|---|---|
| सूर्य | चंद्रमा, मंगल, गुरु | बुध | शुक्र, शनि |
| चंद्रमा | सूर्य, बुध | मंगल, गुरु, शुक्र, शनि | कोई नहीं |
| मंगल | सूर्य, चंद्रमा, गुरु | शुक्र, शनि | बुध |
| बुध | सूर्य, शुक्र | मंगल, गुरु, शनि | चंद्रमा |
| गुरु | सूर्य, चंद्रमा, मंगल | शनि | बुध, शुक्र |
| शुक्र | बुध, शनि | मंगल, गुरु | सूर्य, चंद्रमा |
| शनि | शुक्र, बुध | गुरु | सूर्य, चंद्रमा, मंगल |
कदम 2
उलटी दिशा अलग से देखें
चंद्रमा की पंक्ति में बुध मित्र है। लेकिन बुध की पंक्ति में चंद्रमा शत्रु है। दोनों बार संदर्भ ग्रह अलग है, इसलिए संबंध दोनों दिशाओं में एक जैसा होना ज़रूरी नहीं।
कदम 3
इसे कुंडली की स्थिति से अलग रखें
इस पद्धति में नैसर्गिक संबंधों की तालिका निश्चित रहती है। तात्कालिक संबंध अलग नियम से देखा जाता है, जो कुंडली में ग्रहों की एक-दूसरे से स्थिति पर निर्भर करता है।
श्लोक 15 में एक अन्य मत भी दिया गया है। इस गाइड में श्लोक 16–17 में अपनाई गई सत्याचार्य की तालिका का उपयोग किया गया है।