तात्कालिक ग्रह-मित्रता: किस ग्रह से गिनें?
तात्कालिक संबंध इस बात पर निर्भर करता है कि एक ग्रह दूसरे से किस स्थान पर है। नैसर्गिक तालिका के विपरीत, ग्रहों की आपसी स्थिति बदलने पर यह वर्गीकरण बदल सकता है।
कदम 1
गिनती का शुरुआती स्थान चुनें
जिस ग्रह से संबंध देखना है, उसके स्थान को पहला मानें। अगला स्थान दूसरा होगा, और इसी तरह बारह तक गिनें। गिनती उस ग्रह से शुरू करें, अपने-आप लग्न से नहीं। नीचे के उदाहरण में केवल क्रमांक वाले स्थान लिए गए हैं; कोई भाव-गणना पद्धति तय नहीं की गई है।
कदम 2
मित्रता वाले छह स्थान देखें
श्लोक के मुख्य नियम में दूसरे, तीसरे, चौथे, दसवें, ग्यारहवें और बारहवें स्थान पर मौजूद अन्य ग्रह संदर्भ ग्रह के तात्कालिक मित्र हैं। बाकी स्थानों के ग्रह तात्कालिक शत्रु की श्रेणी में आते हैं।
कदम 3
क्रमांक से एक उदाहरण
गुरु को संदर्भ ग्रह मानें। यदि शुक्र गुरु से दूसरे स्थान पर है, तो वह गुरु का तात्कालिक मित्र है। गुरु से सातवें स्थान पर मौजूद शनि उसका तात्कालिक शत्रु होगा। दोनों संबंध अलग-अलग देखे गए हैं और दोनों की गिनती गुरु से शुरू हुई है।
कदम 4
दोनों तरह के संबंध अलग लिखें
नैसर्गिक तालिका में गुरु की पंक्ति शुक्र को शत्रु बताती है। लेकिन दूसरे स्थान वाले उदाहरण में शुक्र तात्कालिक मित्र है। दोनों बातें साथ लिखी जा सकती हैं: एक निश्चित तालिका से मिली है और दूसरी ग्रहों की आपसी स्थिति से।
श्लोक 18 में कुछ आचार्यों का एक अतिरिक्त मत भी है, जो उच्च राशि से मित्रता जोड़ता है। वह ऊपर समझाए गए छह-स्थान वाले मुख्य नियम में शामिल नहीं है।