पारंपरिक दिन सूर्योदय से क्यों गिना जाता है?
सूर्योदय से गिना जाने वाला सावन दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, जबकि आम कैलेंडर की तारीख आधी रात को बदलती है।
कदम 1
शुरुआत का समय पहचानें
इस पारंपरिक गणना में सूर्योदय पर नया दिन शुरू होता है और अगले सूर्योदय पर वह पूरा होता है। यह दिन की सीमा तय करने का एक तरीका है। इससे आपके फ़ोन या आम कैलेंडर में दिखाई गई तारीख नहीं बदलती।
कदम 2
आधी रात से तुलना करें
आधी रात से अगली आधी रात तक की तारीख और सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक के समय का कुछ हिस्सा साझा होता है, पर दोनों की सीमाएँ अलग हैं। आधी रात के बाद के शुरुआती घंटे पिछले दिन के सूर्योदय से शुरू हुए समय के भीतर आ सकते हैं।
कदम 3
एक काल्पनिक उदाहरण देखें
मान लीजिए मंगलवार और बुधवार, दोनों दिन सूर्योदय सुबह 6:00 बजे है। बुधवार सुबह 3:00 बजे कैलेंडर में बुधवार होगा, लेकिन मंगलवार के सूर्योदय से शुरू हुआ समय अभी जारी रहेगा। ठीक बुधवार सुबह 6:00 बजे के सूर्योदय पर अगला दिन शुरू होगा। ये समय उदाहरण के लिए हैं; वास्तविक सूर्योदय तारीख और स्थान के साथ बदलता है।
कदम 4
पंचांग का स्थान देखें
किसी प्रविष्टि का अर्थ निकालने से पहले पढ़ें कि उस पंचांग में दिन कैसे गिना गया है और सूर्योदय किस स्थान का दिया है। समय-क्षेत्र भी देखें। तुलना करते समय छपी तारीख, सूर्योदय की सीमा और घटना के समय को अलग-अलग पहचानें।