काल बल: दिन, रात और चंद्र-पक्ष का वर्गीकरण
इस परंपरा में काल बल समय से जुड़ी स्थितियों का वर्गीकरण है। श्लोक 21 दिन और रात को अलग करता है और चंद्रमा के बढ़ते तथा घटते पक्ष का भी अलग उल्लेख करता है।
कदम 1
दिन और रात की श्रेणियाँ पढ़ें
श्लोक और टिप्पणी (a) सात ग्रहों को इन समूहों में रखते हैं।
| समय की श्रेणी | बताए गए ग्रह |
|---|---|
| रात | चंद्रमा, मंगल, शनि |
| दिन | सूर्य, गुरु, शुक्र |
| दिन और रात दोनों | बुध |
कदम 2
ऐसा उदाहरण लें जिसमें स्थानीय रात निश्चित हो
मान लें जन्म उस स्थान पर सूर्यास्त के बाद और अगले सूर्योदय से पहले हुआ था। नियम के दिन-रात वाले हिस्से में तब रात का समूह और बुध की दोनों समय वाली श्रेणी देखी जाएगी। केवल इस मिलान से ग्रह के हर तरह के बल का हिसाब नहीं निकलता।
कदम 3
चंद्र-पक्ष वाला नियम अलग पढ़ें
इसी श्लोक में घटते चंद्रमा के कृष्ण पक्ष को पाप ग्रहों की श्रेणी से और बढ़ते चंद्रमा के शुक्ल पक्ष को शुभ ग्रहों की श्रेणी से जोड़ा गया है। यहाँ शुभ और पाप पारंपरिक वर्गों के नाम हैं। यह पक्ष पर आधारित अलग स्थिति है; इससे दिन-रात की तालिका बदल नहीं जाती।
कदम 4
जो विधि यहाँ नहीं दी गई, उसे अलग रखें
अंश में ग्रह के अपने वर्ष, मास, दिन और घंटे का भी उल्लेख है, लेकिन यहाँ उनकी गणना नहीं समझाई गई है। ज्ञात स्थानीय समय-श्रेणी और चंद्र-पक्ष लिखे जा सकते हैं, पर केवल इनसे पूरे काल बल के अंक नहीं निकलते।