पत्ता, फूल, फल या जल
गीता के इस परिचित अंश में सरल भेंट के साथ प्रेम और भक्ति का महत्व समझें। फिर देखें कि अर्पण का यही भाव रोज़मर्रा के कामों तक कैसे जाता है।
कदम 1
सरल भेंटों से शुरू करें
नौवें अध्याय में कृष्ण पत्ते, फूल, फल और जल का उल्लेख करते हैं। इन साधारण चीज़ों से शुरुआत करके सोचें कि किसी वस्तु को अर्पित करने का क्या अर्थ है।
कदम 2
भेंट के पीछे का भाव देखें
आर्नल्ड के अनुवाद में श्रद्धा, प्रेम और देने वाले के भक्तिभाव पर ज़ोर है। पढ़ते समय ध्यान दें कि भेंट किस मन से दी जा रही है।
कदम 3
भक्ति को रोज़मर्रा से जोड़ें
अगली पंक्तियों में भोजन करने, दान देने और प्रार्थना करने जैसे काम कृष्ण को समर्पित करने की बात आती है। अर्पण का भाव रोज़ के कामों तक फैलता है।
कदम 4
एक छोटा-सा चिंतन
घर में किसी को एक गिलास पानी देते समय, चाहें तो उस छोटे-से काम में अपनेपन का भाव महसूस करें। क्या यह भाव आपको अर्पण का अर्थ समझने में मदद करता है?
इन सरल भेंटों के ज़रिए देने के सच्चे भाव पर विचार कर सकते हैं।