Astro Auntyवैदिक ज्योतिष · स्मृति रूबी

ग्रह की राशि और अंश पहचानें

आज आप सीखेंगेराशि और अंश पढ़ना, और पूरे राशिचक्र में मापी गई स्थिति से इन्हें निकालना।

44° का स्थान: वृषभ में 14°डिग्री की पट्टी में मेष 0° से 30° और वृषभ 30° से 60° तक है। बिंदु 44° पर है।देशांतर का उदाहरणमेषवृषभ0°30°60°44°44° − 30° = 14°
इस उदाहरण में गिनती चुने हुए राशिचक्र के मेष के आरंभ से है। मेष 0° से 30° से पहले तक है; ठीक 30° पर वृषभ शुरू होता है। 44° में से 30° घटाने पर स्थान मिलता है: वृषभ 14°। ठीक 60° पर मिथुन शुरू होता है।

बारह बराबर राशियाँ

राशिचक्र 360 अंश का एक वृत्त है, जिसे बारह बराबर राशियों में बाँटा गया है। हर राशि 360 ÷ 12 = 30 अंश की है। मेष 0° से 30° से पहले तक है, वृषभ 30° से 60° से पहले तक, और यही क्रम पूरे वृत्त में चलता है।

मेष के आरंभ से पूरे वृत्त में मापी गई स्थिति को यहाँ देशांतर कहेंगे; इसे भोगांश भी कहते हैं। राशि और अंश निकालने के लिए देखें कि बिंदु किस 30° वाले भाग में है और उस भाग की शुरुआत से कितना आगे है। जैसे 'वृषभ 14°' में वृषभ राशि है और 14° उसके भीतर की स्थिति है।

राशि संख्या और अंश

राशियों का क्रम तय है: मेष (Aries), वृषभ (Taurus), मिथुन (Gemini), कर्क (Cancer), सिंह (Leo), कन्या (Virgo), तुला (Libra), वृश्चिक (Scorpio), धनु (Sagittarius), मकर (Capricorn), कुंभ (Aquarius) और मीन (Pisces)। मीन के बाद गिनती फिर मेष पर लौटती है।

राशि की क्रम संख्या को अंश से अलग रखें। वृषभ क्रम में दूसरी राशि है, पर 2 उसका अंश नहीं है। '14° वृषभ' में 14 वृषभ के भीतर के अंश गिनता है। ठीक सीमा पर अगली राशि लें: 30° का अर्थ है 0° वृषभ, न कि 30° मेष।

राशिचक्र की पद्धति एक जैसी रखें

रिपोर्ट में राशिचक्र की पद्धति का नाम देखें। यहाँ संदर्भ में दिए पाठ्यक्रम में निरयन और सायन, दोनों पद्धतियाँ हैं। इनमें राशिचक्र का आरंभ अलग आधार से तय होता है, इसलिए एक ही क्षण की स्थिति दोनों में अलग राशि या अंश में लिखी जा सकती है।

यहाँ आपको दोनों के बीच रूपांतरण नहीं करना है। दो रिपोर्टें मिलाते समय पहले उनकी राशिचक्र पद्धति देखें। पद्धति अलग हो तो राशि या अंश का अंतर उसी कारण हो सकता है; ज़रूरी नहीं कि जन्म विवरण गलत हों।

उदाहरण से समझें

100° पर एक काल्पनिक बिंदु

एक काल्पनिक अभ्यास में कोई बिंदु मेष के आरंभ से 100° पर है। उसकी राशि और अंश निकालिए।

  1. सीमाएँ लिखें: मेष 0–30°, वृषभ 30–60°, मिथुन 60–90°, कर्क 90–120°।
  2. 100° अंक 90° और 120° के बीच है, इसलिए राशि कर्क है।
  3. कर्क का आरंभ घटाएँ: 100 − 90 = 10। स्थिति है: कर्क 10°।

अब आपकी बारी

खुद करके देखें

एक बिंदु मेष के आरंभ से 44° पर है। उसकी राशि और अंश निकालिए। ठीक 30° पर कौन सी राशि शुरू होती है?

उत्तर देखें

मेष के 30° घटाएँ: 44 − 30 = 14, इसलिए बिंदु 14° वृषभ पर है। ठीक 30° का अर्थ है 0° वृषभ, क्योंकि सीमा पर अगला खंड लिया जाता है।

एक छोटा सवाल

एक बिंदु मेष के आरंभ से 75° पर है। उसकी राशि और अंश क्या हैं?

कारण समझें

मिथुन 60° से 90° तक है, इसलिए 75° मिथुन में पड़ता है। 60 घटाने पर 15° बचते हैं। वृषभ 60° पर खत्म हो जाती है, और कर्क 90° से पहले शुरू नहीं होती।

तीन बातें याद रखें

  • 30° की बारह राशियाँ मिलकर 360° बनाती हैं।
  • राशि का आरंभिक अंश घटाकर उसके भीतर का अंश निकालें।
  • रिपोर्टों की तुलना करने से पहले उनकी राशिचक्र पद्धति मिलाएँ।

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