ग्रहों से परिचय
आज आप सीखेंगेसूर्य, चंद्रमा और पाँच ग्रहों के नाम जानना, और राहु-केतु को चंद्रमा के पात के रूप में पहचानना।
सात शास्त्रीय ग्रह
ग्रहों की शास्त्रीय सूची में सात नाम हैं: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि। वराहमिहिर का शास्त्रीय ग्रंथ बृहत् जातक इस पाठ्यक्रम में बार-बार काम आता है, और उसमें यही सात कुंडली की शब्दावली का मूल हैं। छठे दिन आप इन्हें राशियों के स्वामियों के रूप में फिर देखेंगे।
अंग्रेज़ी में ग्रह को अक्सर 'planet' लिखा जाता है, लेकिन ज्योतिष में इसका अर्थ अधिक व्यापक है। इसमें सूर्य और चंद्रमा भी शामिल हैं, जिन्हें ज्योतियाँ कहा जाता है। इनके साथ पाँच ग्रह हैं: मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि।
राहु और केतु: चंद्र पात
कुंडलियों में राहु और केतु भी दिए जाते हैं। उद्धृत अनुवाद इन्हें चंद्रमा का आरोही और अवरोही पात कहता है। पात वह बिंदु है जहाँ चंद्रमा का आकाश में दिखने वाला मार्ग सूर्य के वार्षिक मार्ग को काटता है। सूर्य के इस आभासी मार्ग को क्रांतिवृत्त कहते हैं। ऐसे दो बिंदु होते हैं।
राहु वह पात है जहाँ चंद्रमा क्रांतिवृत्त के दक्षिण से उत्तर की ओर जाता है; केतु वह पात है जहाँ वह उत्तर से दक्षिण की ओर जाता है। इन दो बिंदुओं को सूर्य, चंद्रमा और पाँच ग्रहों के साथ जोड़ें, तो कुल नौ नाम होते हैं। इन्हें मिलाकर नवग्रह कहा जाता है।
रिपोर्ट की संकेत-सूची पढ़ना
कई रिपोर्टों में ग्रहों के संक्षिप्त नाम या चिह्न होते हैं। साथ दी गई संकेत-सूची बताती है कि कौन-सा चिह्न किस ग्रह का है। कोई स्थिति पढ़ने से पहले हर चिह्न का पूरा नाम देख लें, ताकि एक ग्रह को दूसरे से न मिलाएँ।
इन समूहों का अंतर याद रखें। आधुनिक खगोलशास्त्र में सूर्य एक तारा है, चंद्रमा पृथ्वी का उपग्रह है, और राहु-केतु भौतिक पिंड नहीं, गणना से निकाले गए बिंदु हैं। ज्योतिष में इन सभी के लिए ग्रह शब्द इस्तेमाल होता है। कुछ रिपोर्टों में वक्री गति का चिह्न भी मिलता है; इसे समझने के लिए आगे एक अलग गाइड दी गई है।
- सूर्य
- चंद्र
- पाँच ग्रह: मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि
- दो पात: राहु, केतु
उदाहरण से समझें
काल्पनिक संकेत-सूची पढ़ना
एक काल्पनिक अभ्यास-पत्र की संकेत-सूची में नौ संक्षिप्त नाम हैं: सू, चं, मं, बु, गु, शु, श, रा, के। हर संक्षेप का पूरा नाम लिखें और गिनकर पक्का करें कि पूरे नौ नाम हैं।
- पूरे नाम लिखें: सू = सूर्य, चं = चंद्र, मं = मंगल, बु = बुध, गु = बृहस्पति (गुरु), शु = शुक्र, श = शनि, रा = राहु, के = केतु।
- समूह से गिनें: 1 सूर्य + 1 चंद्र + 5 ग्रह + 2 पात = 9 प्रविष्टियाँ।
- कोई भी स्थिति पढ़ने से पहले पक्का करें कि कुछ छूटा नहीं है।
अब आपकी बारी
खुद करके देखें
सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु को चार समूहों में बाँटिए: सूर्य, चंद्र, पाँच ग्रह और दो पात।
उत्तर देखें
सूर्य; चंद्र; मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि; राहु और केतु। ये समूह बताते हैं कि हर संकेत किस चीज़ के लिए है। इनसे कुंडली की नौ प्रविष्टियों वाली पारंपरिक शब्दावली नहीं बदलती।
एक छोटा सवाल
कौन सी जोड़ी चंद्र पात है?
कारण समझें
उद्धृत अनुवाद राहु और केतु को आरोही और अवरोही चंद्र पात बताता है। सूर्य और चंद्र दो ज्योतियाँ हैं, और मंगल व शनि पाँच ग्रहों में आते हैं।
तीन बातें याद रखें
- सात शास्त्रीय ग्रह हैं: सूर्य, चंद्र और पाँच ग्रह।
- राहु और केतु आरोही और अवरोही चंद्र पात हैं।
- ये नौ मिलकर नवग्रह कहलाते हैं।